सतीश मित्तल- विचार

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

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अवार्ड वापसी मंत्रालय

Posted On: 9 Nov, 2015 Others में

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गिरते है शाह-सवार ही मैदाने-जंग मे, वो तुफ्ल क्याँ गीरेंगे जो घुटनो के बल चलते हो । चुनाव में हार जीत तो लगी रहती है। यही उलट फेर लोकतंत्र को मजबूत करता है।आज अवार्ड वापसी पर गरमागरम बहस शुरू हुई। सुझावों की सुनामी आ गई। हर कोई ऐरा गैरा नथ्थू खैरा बहस के हवन में अपनी आहूति डालने को बेताब था। सभी एकमत थे कि अवार्ड ,पुरूस्कार , डिग्री लौटाने वालों का सम्मान हर सूरतेहाल में करना चाहिए। मियाँ ग़ालिब ने भी फरमाया है – चल साथ कि हसरत दिले-मरहूम से निकले, आशिक का जनाजा है जरा धूम से निकले ”
” आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है ” के तहत सुझाव आया – अवार्ड ,पुरूस्कार वापस करने वालों की लाइन देखते हुए मोदी सरकार को “अवार्ड वापसी मंत्रालय ” का गठन करना चाहिए। हर कोई वापसी की जल्दी में है। लोहा गरम है। डर यह भी है कि कल यदि सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानियों की टीम इंडिया जिसमें केवल 4.5% ग्रेजुएट है, अपनी डिग्री लौटाने लगें तो वो किस को अप्प्रोच करगें। डिग्री वापस करने वाले भला मीडिया को ,किस दफ्तर में या पार्टी में ढूंढेगा। किस-किस कैमरे के पीछे दौड़ेगा। केंद्र सरकार का यह नया बना मंत्रालय इसी समस्या का हल होगा। जो एक निश्चित दिन, समय व तिधि पर डिग्री वापस करने वालों को विशेष समारोह में आमंत्रित करेगा और मीडिया व आम लोगों की मौजूदगी में, जल-पान व लजीज खाने की व्यवस्था के बीच डिग्री ,अवार्ड वापस करने वालों को सम्मानित करेगा और अवार्ड , डिग्री लौटाने वाले सज्जनों का देश व समाज में योगदान पर चर्चा करेगा। जिंदगी के कुछ और वसंत देखने वाले अवार्ड या डिग्री धारकों को काला धन वापस लाने वालों की तरह , वापसी के समय विशेष सम्मान दिया जाएगा। आखिर आम चूस कर गुठली रखने से क्या फायदा ? ओल्ड एज में वापस की डिग्री या अवार्ड क्सिी फर्जी डॉक्टर या नकली डिग्री में फंसे मंत्री महोदय के काम आ सकती है। जो उसे कोर्ट कचहरी के चक्कर से बचा सकती है। आखिर मोतिया बिंद आँखों में चश्मे बिना काला अक्षर भैस बराबर जो नजर आता है। बुढ़ापे में अवार्ड , डिग्री की बजाय प्रेम की आवश्यकता अधिक होती है। कबीर ने कहा है – पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडीत भयो न कोए..ढाई अक्षर प्रेम के पढ़े तो पंडीत होए.।
सरकार जीरो टॉलरेन्स की नीति पर चल अवार्ड वापसी मंत्रालय
का गठन जल्दी करें। ताकि परोपकार वश इच्छुक लोग अवार्ड , डिग्री वापस कर सकें । कोई अवार्ड , डिग्री छाती पर रख कर थोड़ा ही ले जाएगा। इसी लिए सरकारों से अनुरोध है क़ि अवार्ड वापसी मंत्रालयों का गठन कर अवार्ड,डिग्री वापस करने वालों की समस्या का समाधान करें। ताकि वापसी के लिए इधर उधर भटकना ना पड़े।

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