सतीश मित्तल- विचार

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

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नोटबंदी से बैंकों में भीड़……

Posted On: 13 Nov, 2016 में

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रविवार(13thNov.16), दिल्ली । बच्चे को CA एग्जाम सेंटर “लवली पब्लिक स्कूल, प्रियदर्शिनी विहार” छोड़ने गया । सोचा वापसी में बैंक से रोममर्रा के जरूरी खर्च-दवाई आदि के लिए कुछ रूपये लूं। जाते-आते समय रास्ते में लगभग 10-12 बैंक पड़े (शाहदरा, विवेक विहार, दिलशाद गार्डन, प्रियदर्शिनी विहार ,कृष्णा नगर आदि) सभी में भीड़ की सुनामी देख होश फाख्ता हो गये। यह भीड़ न तो नंबर दो के पैसे वालों की थी, न ही हवाला कारोबार में लिप्त लोगों की, न ही ब्लैक मनी वालों की थी और न ही गैर कानूनी धंधों लिप्त लोगों की, न ही जाली करेंशी चलाने वालों की।
इस भीड़ में उद्योगपति, व्यापारी, नेता या सूट-बूट वाले भी नजर नहीं आ रहे थे। दूर-दूर तक भीड़ की सुनामी में केवल सिर्फ केवल दो जून रोटी कमाने वाले लोग नजर आ रहे थे ,जो केंद्र सरकार की बिना तैयारी के Rs.500 व् Rs.1000 के इन्डियन करेंसी नोटबंदी वाले निर्णय के कारण अपनी घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पैसे होते हुए भी , पूरा करने में असहाय हो चले हैं।
इन लोगों में प्रचलन में बंद हुए नोटों को जमा करने की कोई जल्दी नहीं है, इसका इन्तजार 30 Dec.16 तक किया जा सकता है, यह इस बिचारी भीड़ को भी पता है। परन्तु नून-तेल- लकड़ी, किराया, इलाज आदि के लिए पैसा तो तुरंत प्रचलित मुद्रा में चाहिए। ऐसे ही लोग बैकों के सामने भीड़ की सुनामी में अपने को बेआसरा व् असहाय पा रहें है। सरकार का फैसला अच्छा है। सभी इसका समर्थन कर रहें है। परन्तु आधी-अधूरी तैयारी ने देश के गरीब लोगों को अपने काम धधे छोड़ बैंकों की लाइन में खड़ा होने को मजबूर कर दिया है। बाजार में 100 रूपये के नोट पर्याप्त मात्रा में चलन में नहीं है। ऊपर से कोढ़ में खाज यह है कि ATM सॉफ्वेयर व् हार्डवेयर में नयी करेंसी के हिसाब से समय पर बदलाव न कर पाने के कारण करेंसी की कमी से लोग रोजाना जरूरत की चीजें नहीं खरीद पा रहें है। नकद निकासी की सीमा के कारण व्यापारिक प्रतिष्ठान, फैक्ट्री आदि में वर्कर्स को नकद वेतन नहीं बट पा रहा है। सभी व्यापारिक लेन-देन बुरी तरह से प्रभावित हैं। सामाजिक समारोह आदि की रस्में निभा पाना टेढी खीर हो चला है।
अभी चलन में 500 का नया नोट उपलब्ध न होने से लोग 2000 नया नोट, छुट्टे की परेशानी से बचने के लिए लेने से परहेज कर रहें है। वित्त मंत्री महोदय के अनुसार ATM से नकद निकासी को नॉर्मल होने में अभी दो से तीन हफ्ते का समय लगेगा। तो क्या इन हालातों में गरीब को बैंकों की इस भीड़ की सुनामी में अपना काम धाम छोड़ यूं ही छोड़ दिया जाए ?
लोगों की परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार तत्काल उपाय करने की जरूरत है। बैकिंग व्यवस्था ठप है, जो देश के आर्थिक विकास पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है । पुलिश कानून व्यवस्था की बजाय लाइन की व्यवस्था में लगी है ।
जब तक ATM व् बैंकिग सर्विश पूरी तरह से नार्मल न हो व् देश में नए 500 रूपये के नोट प्रचुर मात्रा में चलन में आ जाए, तक तक केंद्र सरकार निम्न उपाय अपनाकर आम जनता को निम्न राहत दे सकती है -
1- केवल पुराने 500 रूपये के नोटों को 30th Dec.16 तक चलन के लिए बैध कर सकती है।
2- आम लोगों की जरूरत को देखते हुए 30th Nov.16 तक बैंक से 2000 रूपये एक्सचेंज करने के लिए फार्म आदि की व्यवस्था को समाप्त कर सकती है।
3- बैंक में चलन में बंद नोटों को जमा करने के खाता धारकों के लिए पेरेंट ब्रांच में अलग से लाइन व् जमा करने की व्यवस्था कर सकती है।
4- 30th Dec.16 तक बैंक कर्मियों को स्पेशल इंसेंटिव देकर बैंक को सभी दिन सुबह से शाम छह बजे तक खोल सकती है। ताकि लोग अपना पैसा अपने खाते में निर्धारित समय सीमा में जमा करा सकें।
5- रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मेट्रो स्टेशन आदि पर 1000 रूपये तक के नोट एक्सचेंज करने की व्यवस्था कर सकती है।
यदि सरकार इसी तरह के उपाय करे तो बैकों में भीड़ की सुनामी व् पब्लिक में रोजमर्रा की जरूरत को पूरा करने के लिए फैले पैनिक को रोका जा सकता है। आशा है सबका साथ, सबका विकास करने वाली सरकार 125 करोड़ टीम इंडिया के परेशानी को ध्यान में रख ,नोटबंदी से हुई आम लोगों की परेशानी को दूर करने की कोशिश करेगी, यह हम सभी को आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है ।

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
17/11/2016

आदरणीय सतीश मित्तल जी लेख वाकई आमजन के दर्द को बखूबी बयां करता है । बस यही कहा जा सकता है कि सरकार से चूक हो गई । तैयारी अधूरी थी । स्वादिष्ट भोजन करते हुए अगर मुंह मे कंकड आ जाये तो मजा बेमजा हो जाता है । कुछ ऐसा ही हो गया है ।


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