सतीश मित्तल- विचार

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नोटबंदी पर पुनर्विचार

Posted On: 15 Nov, 2016 में

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9thNov,16 से पुराने 500 व् 1000 रूपये की नोटबंदी से देश में अव्यवस्था का माहौल है। नोटबंदी निर्णय की समर्थक आम जनता ने इस तरह के हालात की सपने में भी कल्पना न की थी। आजकल लोग जरूरी चीजें खरीदने के लिए पैसे-पैसे से मोहताज है। बैंकों में लंबी लाईन, अफरा-तफरी, अव्यवस्था का माहौल है । सॉफ्वेयर, व् हार्डवेयर में समय से बदलाव व् नए 500 के नोट की कमी के कारण ATM ठप है। व्यापारिक, सामाजिक,मांगलिक कार्य ठहर से गए है। फैक्ट्री में वर्कर्स की सैलरी नकद में देना टेढी खीर हो चला है। नकदी की कमी से रोजगार पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इन सभी परिस्तिथियों को ध्यान में रख,केंद्र सरकार को नोटबंदी के फैसले में थोड़ा सा पुर्नविचार कर संशोधन करना चाहिए।
यदि स्टडी की जाए तो नोटबंदी से पूर्व आम लोगों के पास 500 रूपये के पुराने नोट ही अधिक मात्रा में थे। यह सभी नोट बैकिंग सिस्टम , ATM आदि के माध्यम से जनता के पास चलन में आये । चलन में यही पुराने नोट जी का जंजाल बन लोगों को बैंकों की लाइन में लोग धक्के खाने के लिए मजबूर कर रहें है।
लोगों की भारी असुविधा , नकदी की कमी को देखते हुए यदि केंद्र सरकार पुराने 500 के नोट को केवल 30th Dec.16 तक पहले की तरह सभी जगह वैध कर दे तो देश में अफरा-तफरी, बैकों व् ATM पर लंबी लाइन आदि से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है। वैसे देखा जाये तो केंद्र सरकार ने पुराने 500 व् 1000 के नोटों को 24th Nov.16 तक सीमित स्थान जैसे पेट्रोल पम्प, रेलवे बुकिंग, सरकारी अस्पताल, गैस खरीद आदि में वैध किया हुआ है। ऐसा करने से नगदी का फ्लो बढ़ जाएगा। और इसी बीच नई करेंसी भी पर्याप्त मात्रा में चलन में उपलब्ध हो जाएगी। इस तरह से बैकिग व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है। साथ ही आम लोगों को यह बड़ी राहत होगी।

निश्चित ही नोटबंदी के निर्णय में पुनर्विचार से संशोधन जनहित में उठाया गया एक बड़ा महत्वपूर्ण व् सकारात्मक उठाया गया कदम साबित होगा। क्या सरकार जनहित में अपने निर्णय पर पुनर्विचार करेगी ?

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