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सतीश मित्तल- विचार

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सुरक्षा कारणों से लोगों का गाँव से शहरों की ओर पलायन

पोस्टेड ओन: 14 Oct, 2011 जनरल डब्बा में

आज महानगरों , मेट्रो सिटी में लोग अक्सर जिक्र करते हैं कि आज गाँव के लोग शहरों की तरफ भाग कर यहाँ की भीड़ बढ़ा रहें हें ! इसी लिए इन नगरों की आबादी बढ़ी हे ! व् सीमित साधनों पर दबाव पड़ रहा हे ! शहर शलम में तब्दील हो रहें हें ! क्या शहर का आकर्षण इतना हे कि वह बिना मतलब के शहर की ओर भाग रहा हे ? या फिर इसके पीछे कुछ ओर समस्या हे ! सामाजिक शास्त्र की एक शाखा अर्थशास्त्र के अनुसार ग्रामीण लोग शहरों की ओर मूलभत सुविधाओं के कारण गाँव छोड़ते हैं ! इसके अलावा शिक्षा , चिकित्सा व् रोजगार के कारण भी लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं ! परन्तु पंजाब के आतंकवाद अर्थात 1980 के बाद से सुरक्षा कारणों से भी लोगों का गाँव से शहरों की ओर पलायन शुरू हो गया हे !

आज गाँव में रोजगार , घर , सड़क होने के व् वर्षों से वहां रहने के बाद भी लोग लगातार शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हें ! इसका इसका कारण शिक्षा , चिकित्सा , रोजगार , बेसिक सुविधाएँ जेसे सड़क , बिजली , पानी यातायात वहीँ लोगों को गांवों में समुचित सुरक्षा का होना भी हे , वेसे लोगों का शहर , या महानगरों में पलायन करने को लाभ भी हे .!

दिल्ली जेसे शहर में भारत के विभिन्न भागों से आने व् बसने से दिल्ली व् देश को लाभ भी मिलता हे -

1 – देश के बिभिन्न प्रान्तों से दिल्ली में आने से देश को एक बनाने में बड़ी भूमिका हे .

2 – दिल्ली में रोजगार , व्यापार में वृद्धि होती हे !

3 – दिल्ली पुरे देश का दिल की तरह हे . यहाँ आने वाले लोग पुरे देश , गाँव का प्रतिनिधित्व करते हे , अतः देश को अपनी नीति व् बात पहुचाने का मोका मिलता हे ,

4 – विभिन्न प्रदेशों से आये टेलेंट का उपयोग पुरे देश व् समाज को मिलता हे ,

5 राजधानी में जमीन , मकान की अच्छी कीमत मिलती हे ,

6 – लोगों की बचत का देश व् समाज को लाभ मिलता हे ,

7 – देश में एकता , भाई चारे , धार्मिक सदभावना को बढ़ावा मिलता हे .

ओर न जाने कितने सेकड़ों तरह के लाभ होते हें ! यदि गाँव से शहरों की तरफ प्रवाह रुक जाए तो लोगों के रोजगार , इन्वेस्टमेंट , जीवन , देश की एकता , अखंडता पर बुरा प्रभाव पड़ता हे . इसका एक उदाहरण कश्मीर में देखा जा सकता हे . वहां दुसरे प्रान्तों से लोगों के न बसने से वह देश की मुख्य धारा से जहाँ कटा सा मह्सूश

करता हे वहीँ लोगों को अपनी जमीन की सही कीमत भी मुश्किल से मिलती हे ! देश के दुसरे प्रान्तों की टेलेंट का उपयोग न होने के कारण डॉक्टर , इंजीनयर की कमी महसूस की जा सकती हे ! आज अमेरिका . इंग्लेंड इसी लिए आगे हें क़ि उन्होंने बिना देश जाती धर्म में भेद भाव कर संसार के हर हिस्से के टेलेंट का उपयोग कर श्रेष्ट

ता हाशिल की हे !

गाँव से महानगरों में बसने का नुकसान तो जगजाहिर हे . महानगरों के सीमीत संसाधनों पर विपरीत प्रभाव पड़ता हे . साथ ही गाँव से टेलेंट निकल वहां के समाज के विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता हे !

खैर ये सब बातें मुख्य विषय से भटकने की हें . यहाँ मुद्दा इस बात का हे कि आखिर लोग गावों से किन अन्य कारणों से शहर की ओर भागते हे ,

आज मुख्य कारण गांवों में सुरक्षा का न होना एक बड़ा कारण हे . कश्मीर का वहां के पंडितों दुवारा कश्मीर छोड़ना क्या सुरक्षा के मुख्य कारण नहीं हे . आतंकवाद के समय पंजाब से हिन्दुओं का वहां से पलायन करना क्या सुरक्षा का कारण नहीं था . यहाँ तक आज दुनिया के काफी देशों में ये समस्या हे . बंगला देश के निर्माण के समय क्या वो लोग पाकिस्तान छोड़ इण्डिया में पलायन नहीं किये थे ! आज पाकिस्तान में ऐसे हालात हें कि लोग अपना व्यसाय छोड़ देश के विभिन्न भागों में पलायन कर रहें हें !अफगानिस्तान , लीबिया , इजिप्ट सोमालिया जैसे देशों में लोग सुरक्षा के अभाव में इधर उधर पलायन कर रहें हें !

आज देश के शहरों में गाँव से पलायन का अन्य कारणों के अलावा सुरक्षा का अभाव भी मुख्य कारण हे !

मेरा खुद का एक व्यक्तिगत अनुभव हे जब सुरक्षा कारणों से गाँव का हरा भरा वातावरण , व् सेकड़ों वर्षों का पुश्तेनी मकान छोड़ शहर के छोटे से मकान में शिफ्ट होना पड़ा ! उजड़े पड़े मकान को देख आज भी टीस सी उठती है !

शहरों की भीड़ को यदि कम करना है तो वहां सुरक्षा का वातावरण बनाना होगा ! वरना शहरों की भीड़ के लिए , उन्हें शलम बनाने के लिए हम स्वयं जिम्मेदार होंगें .

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
October 16, 2011

सराहनीय लेख सतिश जी सच है की आजकल शहर कंक्रीट के जंगल में बदलते जा रहे हैं, गाँव की सादगी …………….. बस केवल यादें ही रह गयीं हैं http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

shaktisingh के द्वारा
October 15, 2011

राज्य सरकार और केन्द्र सरकार की नीतियों ने लोगों को शहरों की ओर रुख करने पर मजबूर किया है.




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