सतीश मित्तल- विचार

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ट्रेन संख्या ५४५३९ का दर्द ?

Posted On: 27 Mar, 2015 Others में

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कोहरे के कारण ट्रेनों का लेट होना आम बात है। फरवरी से कोहरा खत्म हो गया, परन्तु फिर भी कोई ट्रेन अपने प्रारंभिक स्थान से घंटो की देरी से लभगग हर रोज देरी से चले तो निश्चित ही रेलवे व् रेल-यात्रियों के लिए एक चिंता का विषय है। आपाधापी के इस युग में जब सभी के पास समय अभाव है तो ट्रेन के परिचालन में जरूरत से ज्यादा देरी होना बहुत ही गंभीर बात है। यात्री ट्रेन पकड़ने के लिए जल्दी घर से रेलवे स्टेशन पर पहुँचते है, परन्तु ट्रेन लेट होने पर घंटों प्लेटफार्म पर प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
एक ऐसा ही ज्वलंत उदाहरण सवारी गाड़ी संख्या 54539 का है। हजरत निजामुद्दीन से चलकर अम्बाला (वाया दिल्ली -दिल्ली शाहदरा, गाजियाबाद, मेरठ- मुजफ्फरनगर -सहारनपुर) जाने वाली पैसेंजर ट्रेन पुरानी दिल्ली से सुबह 04:30 AM पर रवाना होती है जो दिल्ली-शाहदरा 04:48 AM पर आती है। यह ट्रेन लगभग रोज ही आधे घंटे से लेकर एक घंटा या दो-दो घंटा पुरानी दिल्ली से देरी से रवाना होती है। रेल-यात्रियों के पास पैसेंजर का टिकट होता है। इसी कारण इस ओर जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 19031( हरिद्वार मेल) जो उक्त गाड़ी के एक लगभग एक घंटे बाद आती है व् दिल्ली-शाहदरा स्टेशन पर लगभग 05:48 AM पर पहुचती है। यात्री के पास पैसेंजर गाड़ी का टिकट होने के कारण यात्री एक्सप्रेस ट्रेन में नहीं चढ़ पाते । यदि यात्री को पैसेंजर ट्रेन का टिकट वापस कर एक्सप्रेस ट्रेन का टिकट लेता है तो टिकट वापसी शुल्क 15 रूपये पड़ता है।
ट्रेन का बिना किसी कारण के जरूरत से ज्यादा देरी से चलना निश्चित रूप से रेलवे की सेवा शर्तों की कमी है l यह भी जानने योग्य है कि सुबह के समय दिल्ली की ओर से मेरठ की ओर जाने वाली यह पहली पैसेंजर गाड़ी है। छोटे स्टेशनों पर एक्सप्रेस गाड़ियों के न रुकने के कारण उक्त पैसेंजर गाड़ी के यात्रियों को गाड़ी के देरी से चलने से भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
आज 27 March,15 को 139 व् National Train Enquiry System पर पता करने पर पता चलता है कि यह ट्रेन 2 घंटे 40 से अधिक की देरी से चल रही है।
फ़रवरी से उक्त ट्रेन का लगातार देरी से परिचालन देखते हुए इस सम्बन्ध में रेल मंत्री जी व् रेलवे की SMS, वेब शिकायते एवं सुझाव पोर्टल पर भी सुझाव व् शिकायत डाली है। देखते है ऊँट किस करवट बैठता है ?
रेल के देरी से परिचालन से यह बात तो साफ़ है कि उक्त ट्रेन का दिल्ली से रवाना होने का जो इस समय सुबह 04:30 AM है, को बदल कर यदि सुबह 05:30 AM के आस-पास कर दिया जाए तो समस्या हल हो सकती है। पहले इस गाड़ी का यही समय था l ट्रेन के चलने के समय परिवर्तन से गाड़ी के देरी से चलने को जहां रोकने में मदद मिलेगी वहीं यात्रियों का समय गाड़ी के देरी से चलने के कारण नष्ट भी नहीं होगा। साथ ही जब ट्रेन जरूरत से ज्यादा लेट हो तो रेलवे के पब्लिक एड्रेसिंग सिस्टम में ट्रेन के देरी से चलने का कारण की उद्घोषणा भी की जानी चाहिए।
आप सोच रहें होंगे कि इस राम कहानी का भला ब्लॉग में डालने से क्या लाभ? कारण हैं -यात्रियों के दुःख को बांटना। बाँटने से दुःख कम होता है। कभी-कभी अंधे का तीर बिटौड़े (उपलों का ढेर /कूप ) में लग भी जाता है और समस्या हल हो जाती है। दुखड़ा रोने से घाव पर मलहम लग जाता है। अर्थात मलहम लगा डाला तो लाइफ झिँगालाला !!

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1 प्रतिक्रिया

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Parmelia के द्वारा
12/07/2016

You got me worried about the lead thing. I always bring the lead/brass/copper/bronze scrap home and it goes in a bucket. Often I’ve had decorated pieces of lead and in my garage I have a rotary grindstone with a rotary wire brush on the opposite end, I use this to clean up the decorated lead pieces and it does make a lot of dust when removing the white coating lead always has. God knows what I’ve been in32.ing&#8a30;…&#82h0;l.from now on it’s a full face mask for me.Thnik my brians ok as I cn stil tyep whitout makgin mistookes.Ted.


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