सतीश मित्तल- विचार

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शिवालय में घंटा चोर

Posted On: 14 Apr, 2015 Others में

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अभी हाल ही के दिनों में इंद्रप्रस्थ राज्य में चुनाव के दौरान पूजा घरों में अचानक से चोरी की अनहोनी घटना बढ़ चली। वोट के लालची नेताओं ने इन घटनाओं को चुनाव में बड़ा मुद्दा बना , पूजाघरों की चोरी को धर्म विशेष की आस्था पर हमले व् सुरक्षा से जोड़ दिया। राजनीति के रण में नादान भक्त चोरी को धर्म के विरुद्ध षड्यंत्र मान,जगह-जगह सड़कों पर सरकार के विरूद्ध प्रदर्शन करते नजर आये। पूजा घरों , शिवालयों , मंदिरों में चोरी की घटना कोई नयी बात नहीं है। यह सदियों से होती आयी है। सनातन धर्म जिसे हम हिन्दू धर्म के नाम से भी जानते है, मे धार्मिक कथाओं में ऐसी ही चोरियों का वर्णन आता है। इनमें से एक शिवालय में घंटा चुराने वाले चोर की भी है। जैसा कि हम सभी जानते ही है कि शिवालयों में घंटा शिव लिंग के ऊपर लटका रहता है । शिव भक्त भोले को जल अर्पण कर नतमस्तक हो घंटा अवशय ही बजाते है।
इसी घंटे पर एक चोर की नजर शिवालय में पड़ी। सुनसान आधी रात में चोर शिवालय में घंटा चुराने के उद्देश्य से गया । घंटा ऊंचाई पर लटका था। उसे चुराने में बार-बार असफल हो रहा था। चोरी जैसा घ्रणित कर्म करने पर भी चोर की भगवान शिव में अटूट आस्था थी। शिव लिंग पर उसके पैर न पड़ जाये इसी लिए वह घंटा चुराने के प्रयास में शिवलिंग से दूर रहकर घंटा चुराने का असफल प्रयास करता रहा। सुनसान रात्रि में जब चोर घंटा चुराने के प्रयास में थक गया तो शिव को दिल से याद कर जोर-जोर से हर हर महादेव , हर हर महादेव का उच्चारण करते हुए , जोश के साथ हाथ ऊपर कर शिव लिंग पर पैर रख खड़ा हो गया और ऊंचाई पर लटक रहे घंटे को पकड़ लिया। सुनसान रात्रि में भोले के डमरू व् शिवालय के घंटे की आवाज गूँज उठी। घंटे की टन-टन, टनाटन , बम बम महादेव की पुकार ने रात के सुनसान अँधेरे को चीर दिया। हाथ में घंटा को पकड़ , लटका चोर शिव लिंग के ऊपर लटक रहे घंटे से रो रो कर जोर जोर से हर हर महादेव , हर हर महादेव, बम बम महादेव को पुकारने लगा।
दयालू भोले शंकर चोर की मनोदशा जान चुके थे। शंकर चोर को सही मार्ग पर लाने के लिए प्रकट हुए। चोर शिव भगवान को सामने देख डर से थर-थर कांपने लगा। अर्द्ध नारीश्वर भोले शंकर ने चोर के सिर पर हाथ रखा। बोले – भोले ! मै तो जल अर्पण मात्र से ही सबकी इच्छा पूरी कर देता हूँ। परन्तु तूने तो मुझे पूरा ही समर्पित कर दिया। मांगों क्या मांगते हो! चोर पश्चाताप में रो उठा। भोले शंकर से लिपट गया। रोकर भाव विहल हो बोला – भोले ! मुझे माफ़ कर दो। अपनी शरण में ले लो। मुझ पापी को मोह माया मोह से मुक्ति दिला दो।
अर्द्ध रात्रि ब्रह्म मूर्त में बदल चुकी थी। तथास्तु कह शिव अंतरध्यान हो गए। तदोपरांत चोर ने बुरे कार्य छोड़ संम्पूर्ण भोले को समर्पित कर दिया।

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