सतीश मित्तल- विचार

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

169 Posts

25902 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 6153 postid : 883071

बंटवारा

Posted On: 10 May, 2015 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जमीन जायदाद में बंटवारे के बाद दो भाईयों में गाय के बराबर बंटवारे को लेकर ठन गयी। दोनों ही भाई गाय में बराबर हिस्सा चाहते थे। सलाह मशवरे के बाद इस शर्त पर बटवारा हुआ कि छोटा भाई गाय के अगले हिस्से का मालिक होगा और बड़ा भाई गाय के थनो पिछले हिस्से का । बंटवारे के बाद दोनों भाई खुशी-खुशी गाय की दिन-रात सेवा करते। छोटा भाई गाय के अगले हिस्से को सहलाता , सिर पर हाथ फेरता , चारा-पानी देता और बड़ा भाई गाय के पिछले हिस्से की साफ़ सफाई में दिन रात एक कर देता। गाय भी खुश हो पूछ को ऊपर उठा देती। खूंटे से बंधी गाय दोनों भाइयों को देख सिर हिलाती ,हुंकारती । गावं वाले इस अजीब से बंटवारे व् गाय की सेवा को देख दांतों तले उंगली दबाते।
बंटवारे के कुछ माह बाद भगवान की कृपा से गाय ने दूध देना शुरू कर दिया। गाय के अगले हिस्सेदार के मालिक छोटे भाई ने गाय के चारे पानी के प्रबंध में कोई कोर कसर न छोड़ी। गाय के पिछले हिस्से के मालिक बड़े भाई ने सुबह-शाम दूध निकालना शुरू कर दिया। छोटे भाई के सामने यह दुविधा की स्तिथि थी। चारा-पानी पर खर्च छोटा भाई करता और दूध बड़ा भाई दूहता। गाय के अगले हिस्से के मालिक छोटे भाई ने दूध में आधा हिस्सा मांगना शुरू कर दिया। पर बड़ा भाई बंटवारे की शर्त की दुहाई देता। चालाक बड़े भाई ने योजनानुसार गावं के सरपंच व् जाने-माने पहलवानों, बॉउन्सर, मसल्स मैन को भी गाय के दूध में शामिल कर लिया।
थक हार कर गाय के दूध की हिस्सेदारी को लेकर छोटा भाई गावं की पंचायत में गया,मुहँ खाए और आँख लजाये की कहावत चरितार्थ करते हुए गाय के दूध के हिस्सेदार सरपंच व् बॉन्सर्स ने बड़े भाई का पक्ष लेते हुए निर्णय दिया कि बटवारे की शर्त के अनुसार गाय के अगले हिस्से का मालिक छोटा भाई है व् पिछले हिस्से का मालिक बड़ा भाई है। क्योंकि गाय का दूध उसके पिछले हिस्से से प्राप्त होता है इसी लिए बड़ा भाई ही दूध का शत-प्रतिशत हकदार है। पंचायत में छोटे भाई ने गाय के चारे-पानी के खर्च की कई दलीलें दी पर सरपंच व् बाउंसर्स टस से मस नहीं हुए। पक्षपाती न्याय कर्ताओं के बीच सारी दलीले नक्कार खाने में तूती की आवाज शाबित हुई।
दुखी हो छोटे भाई ने गावं के एक सयाने आदमी से सलाह ली। उसे माजरा समझते देर न लगी। काफी सोच विचार कर वह छोटे भाई के कान में कुछ बुदबुदाया। सयाने की सलाह से छोटे भाई के होठों पर कुटिल मुस्कान तैर गई।
अगले ही दिन जब बड़ा भाई गाय का दूध दुहने के लिए आया तो छोटे भाई ने गाय के सिर पर डंडे से प्रहार करना शुरू कर दिया। अचानक हुए प्रहार से गाय ने छलांग लगा दी। दूध दुहते बड़े भाई के मुह पर गाय की जबरदस्त लात पडी ,दूध की बाल्टी दूर जाकर पड़ी। इसी प्रकार जब भी बड़ा भाई सुबह-शाम गाय को दूध निकालता, छोटा भाई गाय के सिर पर डंडे से प्रहार करता। बड़े भाई के विरोध करने पर वह कहता कि उसे गाय के अगले हिस्से पर अधिकार प्राप्त है। अतः इस मौलिक अधिकार के इस्तेमाल से उसे कोई नहीं रोक सकता । बात बढ़ने पर मामला एक बार फिर गावं की पंचायत में पहुंचा। गाय का दूध सरपंच व् बाऊंसरों को बंद हो चुका था। सभी गुस्से से बड़े भाई के खिलाफ लामबंद हो चुके थे। दोनों भाइयों की दलील सुनने के बाद सरपंच ने निर्णय सुनाया – “बंटवारे के बाद दोनों भाई गाय की ठीक तरह से देखभाल कर पाने में असमर्थ है। गाय की डंडे से पिटाई की जाती है । दोनों पशु क्रूरता के दोषी है। एक तरह से यह जघन्य गौहत्या की श्रेणी में आना वाला कृत्य है। सरपंचों ने कहा – “बाउंसरों की मदद से दोनों भाइयों की तुरंत प्रभाव से गाय में हिस्सेदारी रद्द की जाती है। गाय की रक्षा व् गौ सेवा के लिए गाय को गौशाला में भेजा जाता है आज से गाय पर पुरे गावं समाज का अधिकार होगा। सरपंचों के निर्णय को सुन दोनों भाई अवाक रह गए। हाथों के तोते उड़ गए । बटवारे की फ़ूट से दोनों भाई गाय से हाथ धो बैठे । अपनी अपनी नासमझी को कोस, हाथ मलते रह गए ।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Patch के द्वारा
12/07/2016

I bring into being hence scores of exciting pack in your blog prcaiipnlly its discussion. Commencing the tons of comments by your articles, I estimate I am not the only one having all the enjoyment here! keep in the lead the sunny work.


topic of the week



latest from jagran