सतीश मित्तल- विचार

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

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योग बनाये निरोग

Posted On: 22 Jun, 2015 Others में

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21,June,15 भारत सहित विश्व के लगभग 190 से अधिक देशों में योग व् स्वास्थय के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। जो स्वस्थ विश्व के लिए एक सराहनीय पहल है। इसी अवसर पर मै अपना नौ वर्षी योग का अनुभव आप सभी के बीच शेयर करना चाहता हूँ :-
हार्ट अटैक के तीन माह उपरान्त जुलाई 2006 । एक बार फिर से सम्पूर्ण स्वास्थय पाने केलिए मैंने योग का सहारा लिया। योग में कौन से आसन,प्राणायाम हों, इसके लिए रामदेव जी की दिल से सम्बंधित C.D.देखी। प्राणायाम व् आसन से सम्बंधित पुस्तकों का अध्धयन किया। भारतीय योग संस्थान, दिल्ली की पुस्तकों का अध्ययन किया। पार्कों में लगने वाली योग कक्षा में गया। जानकार लोगों से चर्चा की ।
बीमारी व् क्षमता के अनुसार प्राणयाम व् आसन का चुनाव कर लगभग 40 से 50 मिनट का नियमित रूप से किया जाने वाला एक पैकेज तैयार किया। योग शुरू करने से पूर्व ह्रदय चिकित्सक से परामर्श लिया ।
अंगरेजी दवाई नियमित लेने, खाने-पीने का परहेज, खाली पेट नियमित मॉर्निगं वाक , नियमित रूप से डॉक्टरी व् लैब जाँच कराने जैसी जरूरी सलाह देते हुए, ह्रदय चिकित्सक ने धीरे-धीरे प्राणायाम व् आसान आसन करने की अनुमति दे दी। जुलाई 2006 से सुबह ( तड़के ) मैंने नियमित रूप से धीमीं गति से निम्न प्राणायाम व् आसनों को करना प्रारम्भ किया जो दिनचर्या का हिस्सा बन वर्तमान में भी चला आ रहा है :-
प्राणयाम _
1 – भ्रस्तिका – 1 से 2 मिनट ( जिसमें धीरे-धीरे स्वांस भरना व् वापस छोड़ना होता है )
२- कपाल भाति – लगभग 400 बार (10 मिनिट )
3 -अनुलोम विलोम – ( 45 बार ) लगभग 10 मिनट
4 – भ्रामरी प्राणायाम – 12 बार
5 – ओमकार /उद्गीथ प्राणायाम – 12 बार
6 साँसों पर ध्यान
(बीच-बीच में आराम देने के लिए प्राणायाम के साथ-साथ हाथ-पैर, कंधे व् गर्दन ,कलाई की सूक्ष्म एक्सरसाइज )
आसान -
–वज्रासन में बैठ (दोनों पोज )मंडूक आसन
– वज्रासन में बैठ तीन बार शंशांक आसन
– कन्धों को क्लोक वाइज ,एंटी कलोक वाइज 10-10 बार गोल गोल घुमाना ताकि कंधें जाम न हो, सर्वाइकल की प्रॉब्लम आदि न हो। गर्दन, हाथ, उंगली सूक्ष्म एक्सरसाइज
। अकुप्रेषर – हाथ में ह्रदय , शुगर , किडनी ,आँख लीवर , बी पी के पॉइंस को दबाना।
– सल्भासन 3 २ बार
-नोकासन 3 बार
– पादोत्तान आसन 3 बार
– पवन मुक्त आसन तीन बार
- -भुजग आसन ३ बार
- ताड़ासन 3 बार
-अंत में शव आसन
योग के बाद पैदल घूमना दिनचर्या की एक अटूट हिस्सा । मेरी निजी राय में प्राणायाम व् आसन शरीर रूपी गाड़ी की सर्विश जैसा है और पैदल घूमना सर्विस की हुई गाड़ी की एक टेस्ट ड्राइव । गाडी की सर्विश ठीक हुई हें या नहीं इसका पता गाड़ी की टेस्ट ड्राइव से पता चलता है। अतः पैदल घूमना आवश्यक है।
प्राणयाम व् आसान मॉनिंग वाक ,संतुलित आहार , नियमित दवाई व् डॉक्टरी चैकअप से लाभ मुझे अनेकों लाभ मिले। हार्ट वाल्व की लीकेज बंद हुई , शुगर में दवाई की डोज कम हुई। हार्ट-बीट की दवाई पूरी तरह से बंद हुई। BP कंट्रोल हुआ।
निश्चित ही यह योग व् आधुनिक चिकित्सा के तालमेल से संभव हो पाया। एक स्वस्थ व्यक्ति को यदि संभावित रोगों से मुक्ति पानी है तो सुबह के समय कुछ वक्त निकाल कर अवशय ही योग करना चाहिए। ताकि वह स्वस्थ रहते हुए अपने घर- परिवार, देश – दुनिया की उन्नति में उचित योगदान दे सके।

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